॥ ૐ ॥
Om
हिन्दी · Bhajan
A bhajan attributed to Traditional.
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... श्री गणेशाय नम: ... विभावरी-शेष, आलोक-प्रवेश विभावरी-शेष, आलोक-प्रवेश, निद्रा छाड़ि उठ जीव। बोलो हरि हरि, मुकुन्द मुरारि, राम-कृष्ण हयग्रीव॥ नृसिंह वामन, श्रीमधुसूदन, ब्रजेन्द्रनन्दन श्याम। पूतना-घातन, कैटभ-शातन, जय दाशरथि-राम॥ यशोदा-दुलाल, गोविन्द-गोपाल, वृन्दावन-पुरन्दर। गोपीप्रिय-जन, राधिका-रमण, भुवन-सुन्दरवर॥ रावणान्तकर, माखन-तस्कर, गोपीजन-वस्त्रहारी। व्रजेर राखाल, गोपवृन्दपाल, चित्तहारी वंशीधारी॥ योगीन्द्र-वन्दन, श्रीनन्द-नन्दन, ब्रजजन भयहारी। नवीन नीरद, रूप मनोहर, मोहन-वंशीबिहारी॥ यशोदा-नन्दन, कंस-निसूदन, निकुञ्जरास विलासी। कदम्ब-कानन, रास परायण, वृन्दाविपिन-निवासी॥ आनन्द-वर्द्धन, प्रेम-निकेतन, फुलशर-योजक काम। गोपाङ्गनागण, चित्त-विनोदन, समस्त-गुणगण-धाम॥ यामुन-जीवन, केलि-परायण, मानसचन्द्र-चकोर। नाम-सुधारस, गाओ कृष्ण-यश, राख वचन मन मोर॥ अनुवाद = अरे जीव! रात्रि समाप्त हो गई अर्थात् रात बीत गई है, उजाला हो गया है। अतः निद्रा त्यागकऱ उठो तथा हरि, मुकुन्द, राम, कृष्ण, हयग्रीव, नृसिंह, वामन, मधुसूदन, पूतनाको मारनेवाले तथा कैटभ नामक असुरका नाश करनेवाले ब्रजेन्द्रनन्दन श्यामसुन्दरका नाम लो। रावणका वध करनेके लिए दशरथनन्दन रामके रूपमें अवतरित हुए, जो यशोदाके लाड़ले हैं, उन गोपालका नाम लो। जो वृन्दावनमें सर्वश्रेष्ठ हैं, गोपियोंके प्रियतम हैं तथा राधिकारमण हैं, त्रिभुवनमें जिनके समान सुन्दर अन्य कोई नहीं है। जो घर-घरसे माखन चुराने वाले हैं, गोपियोंके वस्त्र हरण करनेवाले हैं, ब्रज एवं ब्रजवासियोंके रखवाले, वंशीके द्वारा सबके चित्तको हरण करनेवाले, जो योगियोंके वन्दनीय हैं, तथा समस्त ब्रजवासियोंके भयको हरण करनेवाले हैं, तुम उन नन्दनन्दनका नाम लो। जिनका रूप नवीन मेघोंके समान अत्यन्त ही मनोहर हैं, जो वंशीविहारी हैं, जो मैया यशोदाके नन्दन परन्तु कंसके संहारक हैं, जो निकुञ्जों एवं कदम्ब काननमें रास रचाने वाले हैं, गोपियोंके आनन्दको विशेषरूपसे वर्द्धन करनेवाले हैं एवं प्रेमके भंडार हैं तथा जो पुष्पवाणके द्वारा गोपियोंके कामको बढ़ाने वाले हैं, जो गोपियोंके चित्तको आनन्दित करनेवाले एवं समस्त गुणोंके आश्रय हैं, जो यमुनाजीके जीवनस्वरूप हैं, यमुनाके तटपर नाना प्रकारकी क्रीड़ाएँ करते हैं तथा जो राधाजीके मनरूपी चन्द्रके चकोर हैं – श्रीभक्तिविनोद ठाकुरजी कह रहे हैं – आप लोग मेरी बात मानकर अमृतके समान कृष्णके इन नामों तथा कृष्णके यशका गुणगान करें।
[स्रोत: पुस्तकः श्री़गोड़ीय-गीतिगुच्छ, पन्ना न. ९३-९४]
A bhajan attributed to Traditional.
A bhajan attributed to Traditional.
Vishvamitra (Rigveda 3.62.10) · Vedic
Om — earth, atmosphere, heavens.
Brihadaranyaka Upanishad 1.3.28 · Vedic
Lead me from the unreal to the real.
Pandava Gita (traditional) · Traditional
You alone are my mother and father.
Traditional Ganesh dhyana · Ancient
O curved-trunked, mighty-bodied one, radiant as a million suns — make all my undertakings free of obstacles, always.
Traditional (Deepa shloka) · Ancient
The verse recited while lighting the evening lamp.
Traditional (Shanti Mantra) · Ancient
The universal Sanskrit prayer for the welfare of all beings.
Devotional commentary and life lessons are editorial reflections. Historical details are limited to well-documented facts; devotional belief is labelled as tradition, never presented as proven history.